Shayari

images_1

ज़रूरत

1
के कभी तो समझा होता... क्यूँ ख़ामोशी है आदत मेरी,के कभी तो जाना होता... क्यूँ भर आती हैं आँखें मेरी।के कभी तो देखा होता......
1586530558171

Insaaniyat

1
Insaaniyat-E-Khidmat Kuch Yun Kardi Zamane Ne, Ab Insaan Ki Niyat Saaf Dikhti Hai...

ये दूरियाँ

4
हम कुछ पाने की चाहत में दूर तुमसे आ गए तुम हमको दिखाने की ख़ातिर और फासलें बढ़ा गये. .

Beasar

3
=================== यूँ तो आजाता है असर संगत का पर ये कांटे अब तक महके नहीं आसमान में साथ उड़े मगर ये काले कौए कभी चहके नहीं बन्द घड़ी भी...

Ghazal

4
वो तो शुक्र करो तुम मीठा लहजा है शहज़ादी का जिसको प्यार समझते हो वो ग़ुस्सा है शहज़ादी का मैंने सारी दुनिया में बस एक हसीना...

आओ दीप जलाएं।

10
विश्वास से ही विष का विनाश

Ghazal

5
हुस्न परी हो साथ और बेमौसम की बारिश हो जाए छतरी कौन ख़रीदेगा फिर जितनी बारिश हो जाए ऐसी प्यास की शिद्दत है कि मैं ये...

Ghazal

3
खींच ही लेगा दोस्ती की तरफ़ उसके दुश्मन भी हैं उसी की तरफ़ आपका साथ जिसको मिल जाए क्यों ही देखेगा वो घड़ी की तरफ़ इक झलक उस...

Stay Connected With us

81FansLike
52FollowersFollow