कृष्ण जन्मोत्सव

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जन्म लेंगे मेरे कान्हा🦚

 

पाप बढ़ा जब कंस का,

और बढ़ गया अत्याचार।

बचाने धरा को कष्ट से,

प्रभु जगदीश लिए अवतार।

 

भाद्रपद मासे तिथि अष्टमी,

अर्धरात्रि जन्मे बाल गोपाल।

देख कमलमुख मोहन का,

वसुदेव देवकी हुए जाए निहाल।

 

बाल रूप में भय प्रकट,

चतुर्भुज कृपा निधान।

कैसे बचाएं काल कंस से,

कैसे बदलें विधि का विधान।

 

पहरेदार सब सो गए,

खुल गए कारावास कपाट।

बचा ले जाओ मेरे लाल को,

रोती देवकी कहें चूम ललाट।

 

गिरिजानंदन रक्षार्थ हेतु,

सूप ले चले वसुदेव।

उतर गए फनफनाती यमुना में,

खिलखिला रहे लेटे वासुदेव।

 

ज्यों-ज्यों वसुदेव कदम बढ़ाएं,

त्यों त्यों यमुना बढ़ती जाए।

डुबा ग्रीवा तक मुरारी पिता को,

यमुना विकराल रूप में आए।

 

देख खेल यमुना का,

श्याम ने पग बढ़ाया।

पखार श्रीचरण कान्हा के,

अब यमुना ने मस्तक झुकाया।

 

यमुना हुई आनंदित,

कर स्पर्श कान्हा के चरण।

जन्म लिए हैं जग का रचैया,

सजाएगा सत का रण।

 

पिता के सिर संग सूप में कृष्ण,

पहुँच गए गोकुल। 

दिखाने बाललीला यशोदा को,

देकर  ममता के पल।

 

करें स्तुति देव लोक,

यक्ष गंधर्व गाए गान।

पाप के संघार हेतु,

जन्म लिए करुणा निधान।

 

 

यह तो बस मेरे भाव हैं मैं क्या रचाऊंगी कृष्णा की रचनाएं मेरे कान्हा ने तो मुझे स्वयं ही रचा है।🙏🙏

 

✍शुभ्रा

 

 

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