वक्त की पहचान

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वक्त की पहचान कर इंसान,
वक्त रुकता नहीं किसी के लिए।
वक्त की कदर जो करता है,
समझो वक्त भी है उसी के लिए।
वक्त ने हालात से बेखबर रहे जो,
वह यहां के रहे ,ना वहां के रहे।
मंजिलों ने तो तू चूमें उन्हीं के कदम ,
आगे खोले हुए जो यहां के रहे।
वक्त रहते हुए पहचान लो आज को ,
टालते ही क्यों हो कल के लिए।
फर्ज बनता है जो पूरा करते चलो,
लब पे शिकवे ना हो अश्क पीते चलो ।
अपने गमों को बांटकर, हर खुशी मुस्कुराके,,
जहां पर तुम खुशी लुटाते चलो,
हो चुके हैं जो मायूस तुम बनो ,
दर्द दिल की दवा उनके लिए।
काम ऐसे करो सब हो तुम पर फ़िदा ,
मीठे ही बोल निकले जुबां से सदा।
हिम्मते मर्दों के आगे झुकते रही,
वक्त की आंधियां और मचलती हवा,
वक्त रुकता नहीं है किसी के लिए,
इसलिए वक्त की नजाकत समझना जरूरी है आदमी के लिए।।

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