मैंने देखा एक सपना

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मैंने देखा एक सपना

मैंने देखा एक सपना
क्या कभी यह होगा मेरा अपना।
ए मेरे प्यारे वतन,
बन जाए तू खुशियों का चमन।

महामारी हो जाए यह दूर,
हो जाए जिंदगी फिर से  गतिशील।
बरसे स्वास्थ्य की धारा हम सब पर
बन विश्वगुरू भारत हो जाए प्रगतिशील।

जहां हो सबको रोटी और पीने को पानी,
जहां हो खुशियों से भरी सबकी जिंदगानी।
जहां ना हो पाबंदी हंसने रोने पर,
जिंदा रहे लोग बिना किसी से डर कर।

चिराग व चूल्हे से खाली ना हो कोई घर,
तन पर हो वस्त्र और छत सर पर।
ना कोई फूल मुरझाए खिलकर,
ना झुके  कोई खुद्दार सर डरकर।

रोटी के लिए ना कोई रूह तरसे,
किसानों की मेहनत से मिट्टी में सोना बरसे।
ना लाचार घर में लटका पाया जाए,
बेटियां भी अकेले चलने में ना घबराए।

न कर्ज से किसी का घर बने आग,
चिंता मुक्त रहकर गाए जिंदगी का राग।
इंसान में इंसानियत रहे पूरी,
मजहब के नाम पर न बन जाए दूरी।

गुनाहों की तरफदारी ना करें खादी,
रिश्वत देकर ना करें कोई देश की बर्बादी।
बेगुनाहों के गले में ना पड़े फंदा,
जीत हो सच्चाई की इंसानियत रहे जिंदा।

बच्चों के हाथ में हो किताब और कलम,
ना निकले किसी बालक का कारखाने में दम।
ना उठाए कोई जिल्लत का भार,
कमजोरों की मदद को सब रहें तैयार।

मैंने देखा एक सपना
क्या कभी यह होगा मेरा अपना।
ए मेरे प्यारे वतन,
बन जाए तू खुशियों का चमन।

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