हिसाब

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4.9
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गुजार दी तमाम उम्र एक माँ ने
अपने नौनिहालों को कुछ बनाने में
और फिर एक दिन ऐसा आया
वो माँ अब उनकी कुछ न रही

कहते हैं वो क्या किया तूने अब तक
पर माँ तो हिसाब की बड़ी कच्ची रही
मिलावट नहीं कर पाती है आज भी
स्वभाव से तो माँ बच्ची ही रही।

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