अश्रु

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हर उस लंबी रात की तरह,
कल रात भी बहुत से उन अश्रुओं का अर्धवाहन व शेषदफन करा कर सोई थी ,,
जो दिन दुगनी हँसी पर रात चौगुना हो जाया करते हैं । 
न सुख का कोई बादल,
ना दुख की कोई बिजली,,
पता नहीं क्यों यह फिर भी बरस जाया करते हैं ।।

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