कोरी मोहमाया

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कोरी मोहमाया

दुनिया के इस झमेले को कोई समझ ना पाया
पड़ा रहा जिस फेर में हरदम वह कोरी मोह माया।

कहीं मुखौटे झूठी खुशियों को लिए ओढ़े रहते,
कुछ एक बूंद हंसी को जीवन भर तरसते।

कोई बंधा है प्यार में विश्वास के धागों से,
कोई छला जाता हरदम अपनों के झूठे वायदों से।

कहीं संवरते रिश्ते प्यार व तकरार से,
कहीं टूटती डोर प्रीत की अविश्वास की धार से।

कोई लिए रहता हरदम चंद कागजों की अकड़
कहीं भाग्य कोसा जाए लिए खाली हाथ सिर को पकड़।

नसीब में किसी के बेशुमार प्यार और हजारों के खिलौने,
और कहीं पास में भी नहीं किसी के सोने को भी बिछौने।

कोई रात भर जागता अपने महलों के भी अंदर,
कहीं खुले आसमां के नीचे बहता नींद का समंदर।

विरासत का लिए धन है कोई दौलत  से आगे,
कोई बनाता भाग्य अपना बुनकर मेहनत के धागे।

कोई रहता प्यार की धूप से तिलमिलाए ,
कहीं एक बूंद प्यार पाकर भी कोई मुस्कुराए।

कहीं मिली हार तो कहीं सहज  यश गान
बड़ा अजब साथियों यह मोहमाया का विज्ञान।

✍ Dr. Shubhra Varshney

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