क्या है कविता

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क्या है कविता

पन्नों पर उकेरी आकृति,
जैसे हो शब्दों  की माला।
जीवन दर्शाती प्रेम जगाती,
कविता है भावों की अविरल धारा।

कविता बनाती है कृति,
यही गढती है आकृति।
बनकर जीवन की अभिव्यक्ति,
यह है दर्शनशास्त्र से मिली दूर दृष्टि।

कभी है विकल व्यथित का करुण क्रंदन,
कभी बनती है वैचारिक मंथन।
मानवता का बन अभिनंदन,
कविता साहित्य के मस्तक का चंदन।

कविता में समाविष्ट सभ्यताएं,
भाव की महिमा दर्शन की गरिमाएं।
कविता बन समय सिद्धांत,
कभी लिखती वीरों की अदम्य गाथाएं।

बनकर साहित्य का श्रंगार,
प्रेम घृणा मैत्री बने इसके आविष्कार।
इसमें निहित है रिश्तो की उलझन,
प्रगाढ़ करती यही मन से मन का बंधन।

कविता में निहित शून्य,
कविता कहती है संन्यास।
सौंदर्य का रूप स्वरूप धर,
कविता ने किया प्रकृति का विन्यास।

कविता दर्शाए मां की ममता,
बनकर मानवता का दर्पण लाए समता।
कभी है सरल कभी बन विरल,
जीवन जीने की आकांक्षा करती प्रबल।

बनकर अंतर्मन की ज्योति,
कविता नई राहें है दिखाती।
मन में उठाकर मृदु तरंगे,
कविता है ईश्वर की लिखी सर्वोत्तम पाती।

कविता है समर्पण का तंत्र,
है यह हृदय से हृदय का संवाद।
स्वगान से रचित है यह मंत्र,
है सात्विक प्रेम का यह अंतर्नाद।

✍Dr.shubhra Varshney

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