Ghazal

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वो तो शुक्र करो तुम मीठा लहजा है शहज़ादी का
जिसको प्यार समझते हो वो ग़ुस्सा है शहज़ादी का

मैंने सारी दुनिया में बस एक हसीना देखी है
बाक़ी कोई हुस्न नहीं है चरबा(copy) है शहज़ादी का

देखने वाले सोच रहे हैं मेरे मुँह में सिगरेट है
मैं कहते में शर्माता हूँ बोसा है शहज़ादी का

जब मैं उसका हूँ तो पूछते क्यों हो ये दिल किसका है
नौकर भी उसके होंगे जब बंगला है शहज़ादी का

-Ahmad Azeem

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