Ghazal

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खींच ही लेगा दोस्ती की तरफ़
उसके दुश्मन भी हैं उसी की तरफ़

आपका साथ जिसको मिल जाए
क्यों ही देखेगा वो घड़ी की तरफ़

इक झलक उस हसीन चेहरे की
इक क़दम और शाइरी की तरफ़

एक पतवार नाव की ख़ातिर !
इक नज़र मेरी ज़िंदगी की तरफ़ !!

बच्चा बोला ग़ुबारे वाले से
एक चक्कर मेरी गली की तरफ़ !

जब भी फूलों का ज़िक्र होता है
ज़ेहन जाता है आप ही की तरफ़

ये कोई पूछने की बात है यार
कैसे आए हो शाइरी की तरफ़

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3 COMMENTS

  1. बहुत सुन्दर अज़ीम, तुम्हे अपने वेबसाइट पर देखकर बहुत ख़ुशी हो रही है . तुमसे बहुत अच्छा कंटेंट मिलेगा. 🙂